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तकदीर के सहारे ( Luck and fortune )

कहते हैं इस दुनिया मैं जो भी मिलता है वह तकदीर में लिखा होता है | वरना लाख पैर मार लो कुछ नहीं मिलता |ठीक है ! यह बात हम मान लेते हैं जो तकदीर में लिखा रहता है वह ही हमे मिलता है | पर गहराई से सोचिये तकदीर बनती कैसे है ? हमने पहले जो कर्म कियें होंगे उन्ही के आधार पर हमारी तकदीर बनी होगी मतलब अच्छे या बुरे कर्मो के आधार पर ही तकदीर का निर्माण होता है | तो अपनी तकदीर बनाना हमारे अपने हाथ में हैं |हम सब अपनी अपनी किस्मत का लिखा ही पाते हैं | पर यह सोच के बैठ जाना कि नसीब में लिखा होगा तो मिल जाएगा बेकार मेहनत करने से क्या फायदा | यह ठीक नहीं है | उधाहरण में -नसीब में रोटी खाना लिखा है | रोटी का सारा सामान भी उपलब्ध है | पर रोटियां खुद ही बनकर तो हमारे मुख तक नहीं आएगी ? उसके लिए हमे मेहनत तो करनी ही पड़ेगी | इसी प्रकार हम अपने परिश्रम से अपनी तकदीर चमका सकते हैं | जहाँ तक संभव हो हमे कोशिश करते रहना चाहिए |” हिम्मते मर्दा तो मददे खुदा ” | इश्वर भी हमारी मदद तभी करता है जब हम अपनी मदद खुद करते हैं |

एक छोटा बच्चा जब चलना सीखता है तो दस बार गिरता है | फिर उठता है , फिर संभालता है | लेकिन वह अपना पर्यास नहीं छोड़ता | और एक दिन अपने पैंरो पर दौड़ने लगता है | तकदीर के सहारे वही बैठते हैं जो जी चुराते हैं | जो काम करना नहीं चाहते वही तकदीर का बहाना करते हैं | आज दुनिया में जितनी भी बड़ी बड़ी हस्तियाँ हुई है अर्थात दुनिया में जिनको भी मान सम्मान और प्रसिध्ही मिली है |उसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और पुरुशार्त छिपा है | ज्ञान विज्ञान और किसी भी क्षेत्र में देखेंगे तो अथक मेहनत के बल पर ही व्यतीत का निर्माण होता है |तकदीर के सहारे बैठने वाले तो बैठे ही रह जाते हैं | कभी आगे नहीं बढ़ पाते | एक सीमा तक तो ठीक है कि तकदीर में ना लिखा हो तो हीरा मोती , अटूट सम्पति नहीं मिलती | पर मेहनत करके इंसान इज्जत की रोटी तो खा ही सकता है | तकदीर के आगे तब्दीर हमेशा ही हारते आई है | मेहनत के बल पर भाग्य की लकीरे भी बदल जाती है | आज दुनिया ने कितनी प्रगति कर ली है | बैल गाडी के ज़माने से हवाई जहाज तक आने में बरसो की मेहनत लगी है | तरकी करने के नए नए तरीके ढून्ढ निकले हैं | चिकित्सा विज्ञान के द्वारा आज कितने हि बिमारियों का निधान मिल गया है | कई कारखाने , बिजली बनाने के नए प्लांट , ऑक्सीजन प्लांट और न जाने क्या क्या ? वो सब एक ही दिन में तो संभव नहीं हुआ है |इन सब के पीछे कितने ही विज्ञानियों , सोच कर्ताओं ने रात रात भर जाग कर अतक मेहनत की होगी | जिसका परिणाम आज हमारे सामने है | अतः तकदीर से ज्यादा अपनी मेहनत और लगन पर भरोसा कीजिये |

धन्यबाद

सुधा गोएल

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