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Arrogancy is intoxicant . How? Do you want to know?

Arrogancy is intoxicant
Arrogancy

किसी को तन का घमंड होता है, किसी को धन का | घमंड क्यों नहीं करना चाहिए ? सभी कुछ नश्वर है सबका नाश होना निश्चित है |

उदाहरण – एक बहुत ही खुब्सुरुत लड़की थी | उसे अपने रूप का इतना अभीमान था कि वह सीधे मूह किसी से बात भी नहीं करती थी लगता था की कोई उससे बात कर लेगा , उसके पास आएगा तोह वह मैली हो जाएगी | लेकिन कुदरत का खेल कहिये या घमंड का फल | एक बार वह अपने मित्रों के साथ एक ढाबे मैं चाय पीने गई | बगल मैं भट्टी जल रही थी जिसमे चाय बन रही थी | ना जाने कैसे चाय बनाने वाले के हाथ से कैसे भगोना छूट गया और पूरी की पूरी चाय राधा के चेहरे को , शरीर को जलाते हुए उसीकी के ऊपर गिर गई | नतीजा यह हुआ की वह अपना चेहरा आईने मैं कभी ना देख सकी क्योंकि उसकी आँखें भी चली गई इस हादसे मैं | खुब्सुरुत तोह मन होना चाहिए ,व्यवहार अच्छा होना चाहिए , ऐसा व्यक्ति अपने आप सबका चहीता बन जता है | धन का घमंड भी क्यूँ करे , जिसने दिया है उसका उपकार मनना चाहिए प्रार्थना करनी चाहिए की इस धन का हम सदउपयोग करे| हो सके तोह किसी की भलाई करे | नाकि उस धन का दुरुपयोग करें , अइयाशी करे |कहते हैं की उपरे वाले की लाठी मैं आवाज़ नहीं होती | उसने दिया है , उसे ठीक नहीं लगेगा तोह वह ले भी लेगा और पता भी नहीं चलेगा |

उधाहरण २ – एक धनवान व्यक्ति को बहुत घमंड था कि मेरे पास इतना है कि दोंनो हांतों से भी लुटाऊंगा तोह भी मेरा धन कभी कम नहीं होगा | दुनिया का सबसे अमीर आदमी हूँ | एक बार एक संत महात्मा को इस बात का पता चला उन्होंने अपने मन मैं उसको शिक्षा देने की सोची उसका घमंड तोड़ने चले | उस व्यक्ति के पास पहुंचे | वो धनवान व्यक्ति बोला आयीए महात्मा आपकी क्या सेवा करूँ ?मेरे पास सब कुछ है आप जो मांगेंगे मैं दूंगा |महात्मा बोले मेरे पास यह जो कमंडल है वोह खली है इसे भर दो बस और मुझे कुछ नहीं चाहिए | वह आदमी हसने लगा और अपने आदमियों से बोला महात्मा के कमंडल मैं सोना ,चांदी अशर्फियाँ सब डाल दो , भर दो |वह लोग डालते गए डालते गए लेकिन कमंडल भरने का नाम ही ना ले | धीरे धीरे खज़ाना खाली होने लगा | उस व्यक्ति का घमंड चूर चूर हो गया | वह महात्मा के चरणोंमें गिर पड़ा और बोला मुझे क्षमाँ करे और मुझे बताएं कि इस कमंडल मैं ऐसा क्या है जो मेरा खजाना खली हो गया लेकिंन यह नहीं भरा | महात्मा हसने लगे और बोले यह मनुष्य की इच्छाओं से बना हुआ कमंडल है जो कभी नहीं भरता | इच्छा अनंत है और अनंत है परमात्मा | अनंत ही अनंत को भर सकता है |

घमंड तोह सोने की लन्का मैं रहने वाले रावण का भी नहीं टिका तो साधारण मनुष्य की तोह औकात ही क्या है ? अतः कभी भी किसी भी चीज़ का घमंड नहीं करना चाहिए | अगर हमे कुछ अच्छा मिला है तोह सबसे पहले उस परमात्मा को धन्यवाद देना चाहिए |

मंजू मधोगारिया

(2) Comments

  1. […] अधीक होता है यह तोह कर्म सिद्धांत पर निर्भर होता है| कर्मो के अनुसार ही हमारा नसीब […]

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