Best true hindi stories

Motivational videos(kal aaj aur kal)

अगर हम उलटी गिनती यानी , अगर हम अपने बचपन के तरफ यानी कल में जाते है तो हम गर्व महसूस करते हैं | क्यूंकि जबसे हमने होश संभाला , हमने देखा कि हमारा एक संयूक्त हुआ करता था | जहाँ बड़े छोटे सभी मिल जुल के रहा करते थे | हमारे दादा दादी जो घर के सबसे बड़े थे | सभी छोटे बड़े परिवार के बाकी लोग उनका बहुत मान सम्मान करते थे | उनके अनुभव का एक विश्वास के साथ कि वो कभी गलत हो ही नहीं सकते , इज्जत करते थे , कदर करते थे | हम बच्चे मिल जुल कर खूब मस्ती किया करते थे |झगड़ते भी थे और कुछ समय बाद फिर से घुल मिल जाया करते थे | ये तो हमारे कल था जब हम एक ही रेडियो पर हम सभी सदस्य कान लगाकर बैठ जाया करते थे और एक ही टीवी से सभी आस पास वाले इक्कठे होकर दूरदर्शन का आनंद लिया करते थे |

हमने गीली डंडा , छुपा -छुपी ,खो -खो , कब्बड्डी जैसे खेल खेले हैं | जो आज की पीढ़ी दूर दूर तक इन खेलों से अनजान है | एक साथ मिल जुलकर ज़मीन पर ही बैठ जाया करते थे और खाने का आनंद लिया करते थे | हर त्यौहार को मिल जुल कर बहुत ही आनंद के साथ मनाया करते थे जबकि आज हमारे त्यौहार सिर्फ एक खानापूर्ति बनकर रह गएँ है | नए नए कपडे पहेनकर तरह तरह के व्यंजन खाकर खूब इतराते थे | कल गम था पर ख़ुशी ज्यादा थी | आज को देखे तो आज कल से कई गुना ज्यादा है सभी के पास फिर भी सुख नहीं है ख़ुशी नहीं है | जहाँ कल हमने ज़िन्दगी जी है वहां आज का इंसान जीने को लेकर सिर्फ एडजस्ट करता है | एक ही छत के नीचे परिवार जनो के बीच भी हम अपने आप को अकेला पाते हैं | आज माता पिता , बड़े बूढ़े बोझ जैसे लगते हैं | कहीं कहीं तो उन्हें विध्राश्रम का सहारा लेना पड़ता है | आज की दौड़ भाग की ज़िन्दगी में किसी के पास किसिकेलिये समय नहीं है | आज किसी से मिलना है तो मोबाइल फ़ोन पे मिले | किसीको बधाई देनी है तो मोबाइल फ़ोन पर दे दें | किसीको दुआ देनी है तो भी मोबाइल फ़ोन पर ही देना है | यानी ख़ुशी जाहिर करनी हो या किसीके दुःख में शामिल होना हो तो मोबाईल पर ही होना है | कल हम खुली हवा में सांस लेते थे | आज कूलर एसी के बिना गुजरा नहीं है | कल घर का शाकाहारी और शुद्भोध खाना अच्छा मानते थे तो आज होटल और रेस्टोरेंट में ना जाये तो गवांर समझे जाते हैं | कल जहाँ एक दुसरे के सुख दुःख बांटने के लिए एक हो जाया करते थे |आज किसीके दुःख में शामिल होने के नाम से डर लगता है क्यूंकि इंसान आज सिर्फ अपने ही विषय में सोचता है | इस लिए किसीकी मदद करने से डरता है | आज ख़ुशी का मौका हो या गम भुलाना हो उसके लिए नशे आ आदि होता जा रहा है इंसान | जबकि कल इनके लिए एक दुसरे का साथ कन्धा ही बहुत होता था | ये सब देखते हुए आने वाले कल की कल्पना करने से ही भयभीत हो जाते हैं | अभी जो बच्चे हैं उनका आने वाला कल कैसे होगा | उन्हें कैसी ज़िन्दगी नसीब होगी सोच कर ही घबरात होती है | हम अपने बच्चों को पश्चिमी सभ्यता की और धकेल रहें है | जब हमारे बच्चे अंग्रेजी बोलते हैं तो हम गर्व महसूस करते है | उन्हें ही – बाई कहना सिखाते हैं | मातृभाषा से तो पहचान ही नहीं करा पाते | पश्चिमी सभ्यता , संस्कृति और उनका खाना पीना हमारे बच्चे सीख रहें है ऊपर से ये महामारी की वजह से कुछ भी सही तरीके से सही नियम से नहीं चल रहा है | बच्चों का भविष्य आगे कैसा होगा सोचकर ही घबराहट होती है | बच्चे जब बड़े होंगे तो आने वाले कल में शायद ये कहने वाला कोई न होगा ” तू चिंता मत कर , चल साथ में बैठ कर चाय पीते हैं सब ठीक होगा , मैं हूँ न ” | शायद शायद ………………

Leave a Comment

Your email address will not be published.