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Best motivationalstory “Bhakti ki Shakti”

भक्ति अपने आप मैं एक सम्पूर्ण शक्ति है | इसके विषय में जितना भी लिखा जाए कम है | भक्ति एक सागर के समान है इसमें जो जितना गहरा डूबेगा उतना ही निखर कर आएगा | सागर का जल हम अपने सामर्थ्य के अनुसार ग्रहण कर पाते हैं | यह सागर तो अथा है | आज तक कई भक्तोने इस प्रेमसागर मैं सुबकी लगाकर अपना जीवन सफल किया है और आगे भी करते रहेंगे | भक्ति रस में गोते लगाने वाले , भक्तों की कतार तो बहुत लम्बी है पर मैं आपके सामने एक बूढी दादी की कहानी रखना चाहती हूँ |

बूढी दादी का नाम था ‘क्क्ष्मी ‘| सब उन्हें प्यार से लक्ष्मी दादी ही पुकारते थे | वे शुरू में ही धार्मिक थी | और भगवान् की सेवा पूजा में ही अपना जीवन व्यतीत करती थी |भगवान पे उसका अडिग विश्वास था और वह इस बात पर यकीन रखती थी जो कुछ भी होता है भगवान की मर्ज़ी से होता है | भगवान कभी मेरा अमंगल नहीं होने देंगे उनको ये विश्वास था लक्ष्मी दादी के दो बेटे थे | बड़ा बेटा तो अपने परिवार के साथ विदेश में ही बस गया था | उसका अपने देश में आना ना के बराबर था | छोटा बेटा अपनी माँ के साथ अपनी पत्नी के साथ रहता था | लक्ष्मी दादी के पति छोटी उम्र में ही चले गए थे |कुछ वर्ष तो बेटे और बहु के साथ आराम से निकल गए | लेकिन तभी एक दुर्घटना में छोटे बेटे और उनकी पत्नी का देहांत हो गया | अब लक्ष्मी दादी अकेली रह गयी | आस पड़ोस के लोग दादी का ध्यान रखते थे | दादी ने भी संतोष कर लिया था कि भगवान् की भी यही मर्ज़ी थी तो यही ठीक है | अब वह ज्यादा से ज्यादा समय भगवान् की भक्ति में ही बिताती थी |दादी कभी किसीके सामने हाथ नहीं फैलाती थी न ही किसीके सामने दुःख प्रकट करती थी |आस पड़ोस के लोग अपनी मरीज़ी से उनकी जरूरत की वस्तुएं दे जाते थे |वो उसीमे ख़ुशी ख़ुशी अपना गुज़ारा कर लेते थे | और भगवान् का ध्यान सिमरन करती रहती थी |उनको लगता था कि हर वक्त भगवान् उनके साथ ही रहते हैं | एक बार देवताओं ने उनकी परिस्क्षा लेने की सोची और उन्होंने घर में जो भी खाने पीने का सामान था

सब गयाब क्र दिया |जब दादी का खाना बनाने का समय आया तो उन्होंने देखा कि घर में कुछ भी नहीं है |पर दादी बिलकुल परेशान नहीं हुई | उन्होंने सोचा की भगवान् आज उनसे व्रत करवाना चाहते हैं | इसीलिए आज घर में खाद्यापदार्थ की जरूरत ही नहीं है | और वे भजन गा गा कर भगवान् की महिमा करने लगी | इसी तरह दो दिन बीत गए | दादी को न भूक लगी न प्यास | वे तो भक्ति में इतना डूब गयी कि उनको अपना होश ही नहीं था | अब भगवान् ने कुछ ऐसी लीला रची की पड़ोस की कुछ औरतें दादी के साथ रहने आई| दादी की ये अवस्था देखकर सब समझ लिया | और दादी का घर झाड़कर एकदम साफ़ कर दिया और राशन पानी लाकर अच्छा खाना बनाया | जब उन्होंने दादी को खाना प्रसाद ग्रहण करने को बुलाया तो दादी इतना प्यार दुलार देखकर गद गद हो गयी | भगवान् की कृपा के आगे नत मस्तक होकर प्रसाद ग्रहण किया | अब देवताओं ने देखा की दादी के घर में तो खूब उत्सव हो रहा है | तो वे भी दादी की भक्ति से बहुत प्रभावित हुए | भक्त की भक्ति के आगे तो भगवान् भी झुक जाते हैं | यही है भक्ति की शक्ति | भक्ति भविष्य को लाचार नहीं शक्तिशाली बनती है | इसीलिए भक्तो की हमेशा ही जैजैकार होती आई है और आगे भी होती रहेगी |

धयवाद

सुधा गोएल

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