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Education should not be forced to kids-Tittle of the story – Tumhe padhna hi hoga..

Education should not be forced
तुम्हे पढना ही होगा
अक्सर हम देखते हैं की बच्चे पढाई से बहुत जी चुराते हैं और हर माता पिता यह चाहते हैं कि मेरा बच्चा खूब पढ़े , खूब पढ़े और पढ़ लिखकर कुछ बने | कुछ ऐसा करे जिससे उनका नाम हो |रवि भी पढाई से जी चुराने वाला बच्चा था | वह पढने से बहुत कतराता था , उसे पढने लिखने में रूचि नहीं थी | रवि के माता पिता हमेशा उसपर पढाई के लिए दबाव डालते थे | तुम्हे पढना होगा ,पढ़ लिख कर कुछ बनना होगा | लेकिन कक्षा में रवि का नाम सभी कमज़ोर बच्चों में आता था | जब परीक्षा का परिणाम घोषित होता था तो रवि दो तीन विषयों को छोड़कर सभी में फ़ैल होता था | अब की बार भी ऐसा ही हुआ , रवि परिणाम पत्र लेकर घर पहुंचा | परिणाम पत्र देखने के बाद उसके पिता उसपे बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने उसे खूब मारा | रवि ने कहा ” मुझे नहीं पढना मुझे पढने में जरा भी रूचि नहीं है “| यह सुनकर पिताजी ने कहा ” तुम्हे पढना तो होगा ही , नहीं पढना है तो हमारे घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है “| गुस्से में कही बात रवि ने दिल पे ले ली और घर छोड़ने का फैसला ले लिया | एक दिन वह बिना किसीको बताये घर छोड़ के चला गया | चलते चलते रवि सुमसान रास्ते पे चला गया और रास्ता भटक गया | चलते चलते बहुत थक गया और शाम भी हो गयी पास ही एक नदी बह रही थी , रवि ने थोडा पानी पिया और एक पेड़ की छाँव में जाके सो गया |उसकी आँख लग गयी , थका हुआ था उसे नींद आ गई , कब रात बीत गई उसे पता ही नही चला , जब सूर्य देवता ने अपनी रौशनी बिखेरी तो रवि की आँख खुली और वह बहुत घबराया कि वह कहाँ आ गया है | तभी वह देखता है कि उसी के उम्र के दो लड़के उसके पास आये और पूछने लगे ” तुम कौन हो और यहाँ कैसे आये “? रवि ने अपने आप्ब्यिअती उन लडको को बताई और कहा मै घर नहीं जाना चाहता तो उन लडको ने कहा कोई बात नहीं उमने तो जबसे होश संभाला है हम यहीं जंगल में रह रहें है | तुम भी हमारे साथ रहो | रवि वही रहने लगा |

एक दिन उसने देखा की कुछ सिपाही नदी पे पानी भरने के लिए आते हैं | उन सिपाहियों को बहुत दूर से पानी भरने के लिए आना पड़ता था |और उसने उन लडको से कहाँ कि क्यों न हम उन सिपाहियों के ठिकाने तक पानी पहुंचाने का काम कर दिया करे |हमारा समय भी व्यतीत होगा और हमे कुछ अच्चा काम करने का मौका भी मिलेगा |रवि की बात उन दोनों की समझ में आ गयी और वो दोनों उन सिपाहियों से इज्जाजत लेकर पानी पहुँचाने का काम करने लगे |वहां सिपाहियों को उनकी प्रैक्टिस करता देख और मेहनत से सभी काम करता देखकर उनको बहुत अच लगने लगा | तीनो लड़के उनके कामो में मदद करने लगे | रवि को उन सिपाहियों का निशाना लगाना और बहुत मेहनत से काम करते हुए देखना बहुत अच्छा लगता था | कभी कभी वह उनके पास जाता और कहता मुझे भी यह सब सिखा दीजिये | मुझे यह सब करना अच्छा लगता है |लेकिन सिपाहियों ने उसे समझाया , तुम अभी बहुत छोटे हो यह कहकर टाल दिया करते थे | जैसे जैसे समय बीतता चला गया वैसे वैसे रवि अपनी रूचि से बहुत कुछ सीखता चला गया | उसकी रूचि देखकर सिपाही भी उसे कुछ नहीं बोलते थे और उसे खेल खेल में कुछ न कुछ सिखा दिया करते थे |धीरे धीरे रवि एक सिपाही बन्केने लिए जो कुछ सीखना चाहिए वो सभी उसने सीख लिया उसकी मेहनत और लगन देखकर वहां के चीफ ने उसे एक मौका दिया उसकी परीक्षा ली गयी |जिसमे रवि शत प्रतिशत कामयाब हुआ |उसको सेना में भारती कर लिया गया और रवि एक सफल सिपाही बन गया | देश की सेवा करने के लिए सीमा पर उसकी ड्यूटी लगा दी गयी | रवि ने भी अपने तन मन से अपनी ड्यूटी को अपना धरम समझकर देश की सेवा की | अब जब वह सफल सिपाही बन गया अब उसे लगा कि एक बार उसे अपने घर जाना चाहिए , और वह अपने माता पिता से मिला | सभी रवि से मिलकर बहुत खुश हुए | पिता ने भरभर कर रवि को आशीर्वाद दिया | और हम सब को यह सीख दी की बच्चों के ऊपर कभी भी किसी भी चीज़ का दबाव नहीं डालना चाहिए |सभी बच्चे एक जैसे नहीं होते समय का इंतज़ार करना चाहिए , कोशिश यही होनी चाहिए कि बच्चा गलत रास्ते पे न जाये | अच्छे संस्कारो द्वारा बच्चे में अच्छाई पहचानने की समझ और बुराइ से दूर रहने की आदत डालनी चाहिए |

मंजू मधोगारिया .

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