ek naya bharat kavita

Ek naya Bharat

एक नया भारत

चारों तरफ है हा हा कार

कहीं आग कहीं लूटमार

कहीं दंगो की मारा मार

कहीं नेताओं के भ्रष्टाचार

स्वर्णचीड़ी की बदली सूरत

यह कैसी भारत की सूरत

नेताओं ने किया गुनाह्ह

फिर भी जेलों मैं मौज अतः

भ्रष्टाचार की वाह वाह

पैसा है अफसर की छह

आजादी की लुट गयी पद

ये कैसी भारत की सूरत

बड़ों ने अपना फर्ज भुलाया

बच्चों पर अब ये भार आया

हम पलटेंगे देश की काया

होगी अमन चैन की छाया

सबको मिले रोटी और छत

ऐसी हो भारत की सूरत

हसी ख़ुशीबी के फूल खिलेंगे

मेहनत के पल सब जियेंगे

शांति प्रेम का ये सन्देश

सारे विश्व के सैर करेंगे

हे प्रभु हमको दे ताकत

हमसे बने एक नया भारत

जय हिन्द

सुधा गोएल

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