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Haar ki jeet ..How is it possible??

Haar ki jeet - motivational story

शीर्षक देखकर आपको लग रहा होगा कि यह कैसे हो सकता है – या तो कोई हारेगा या कोई जीतेगा| भला हारने वाला कैसे जीत सकता है | यह जानने के लिये हम कहानी शुरू करते हैं |

एक समय की बात है | एक लड़का था राघाव , बहुत ही गरीब| वह बहुत मेहनत करता था लेकिन दाल , रोटी का ही जुगाड़ कर पता था | उसकी माँ बहुत ही बीमार रहती थी | उनको पेट मैं ट्युमर था | राघव की कमाई का अधिकाँश हिस्सा तो माँ की दवाई और डॉक्टर की फीस मैं ही चला जाता था | राघव माँ से बहुत प्यार करता था| वह उनकी सेवा भी बहुत करता था | माँ के ऑपरेशन के लिये उसे बहुत पैसों की जरूरत थी | उसने बहुत कोशिश की , उधार भी माँगा लेकिन पैसों का प्रबंध नहीं हो सका | वह बहुत उदास था | तभी उसे कुश्ती प्रतियोगिता के बारे मैं पता चला | एक बड़े ही नामी पहलवान ने ये ऐलान करवाया था कि कोई भी उसे कुश्ती के लिये ललकार सकता है | विशेष बात यह थी कि जीतने वाले के साथ-साथ हारने वाले को भी आधे पैसे मिलेंगे | अब राघव के मन मैं आशा का संचार हुआ | क्या हुआ जो वह कुश्ती के दाव- पेंच नहीं समझता | ज्यादा से ज्यादा हार जाएगा , घायल हो जायेगा पर माँ के लिये पैसों का इंतज़ाम तो हो ही जायेगा | उसमे प्रतियोगिता स्थल पर जाकर अपना नाम लिखवा दिया | वहां उसे पता चला कि जितने वाले को २ लाख रूपए और हारने वाले को १ लाख रूपए मिलेंगे | पहेलवान का नाम इतना मशहूर था कि कोई भी उससे कुश्ती करने को तैयार नहीं था | ऐसे मैं राघव का नाम आने पर सभी को बहुत अचरज हुआ | पहेलवान को भी आश्चर्य हुआ | उसने राघव को मिलने के लिये बुलाया | राघव को देखकर उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि उतना दुबला पतला और मरियल सा कोई लड़का उससे कुश्ती लड़ने की इच्छा कर सकता है | राघव से उसने कुश्ती लड़ने का कारन पुछा तो पहले तो उसने कुछ नहीं बताया पर ज्यादा जोर देने पर तब सच-सच बता दीया | पैसे के लिये , माँ का इलाज करवाने के लिये राघव अपनी जान भी जोखिम मैं डाल रहा है, यह जानकार पहेलवान की आँखें भर आई , दिल द्रविड़ हो उठा और उसने राघव की सहायता करने की ठानी | अभी कुश्ती प्रतियोगिता मैं दो दिन बाकी थे | अतः अपने एक सहायक की मदद से राघव को कुश्ती के गुण सिखाये और उसको जितना हो सकता था , तैयार किया |

अब कुश्ती शुरू हो चुकी थी | पहले दो राउंड मैं तो पहेलवान ही जीता लेकिन फाइनल राउंड मैं पहेलवान जान बुझ कर हार गया | अब राघव को २ लाख रूपए मिल गए | राघव जनता था कि पहेलवान जानबुझ कर हारा है | अतः उसने वह पैसे पहेलवान को लेजाकर दे दिए और कहा कि इनपर आपका ही हक़ है | मैं तो कुश्ती मैं आपके चरणों की धुल ही हूँ | लेकिन पहेलवान ने उसको गले से लगा लिया और कहा की तुम मेरे छोटे भाई हो | तुम्हारे माँ मेरी भी माँ है | अतः यह पैसे तुम अपनी माँ के इलाज मैं लगाओ और मेरी तरफ से भी एक लाख रूपए ले कर जाओ | माँ से कहना यह उनके लिये मेरा प्रणाम है|मैं जल्दी ही उनसे मिलने आऊंगा | अब राघव पहलवान के पैरों पर गिर पड़ा | उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह हारा या जीता | अब इस बात का निर्णय आप सब के ही हाथ मैं है कि हार हुई या जीत |

राघव के अच्छे संस्कार और मात्री सेवा भावना ने इतना ऊँचा उठा दिया कि पहेलवान का दिल पिघल गया | उसकी मानवता जाग गयी और उसने वह कर दिया जो कोई सोच भी नहीं सकता था | वह कभी भी कोई प्रतियोगिता नहीं हारा था | लेकिन यहाँ पर हार कर भी उसे जीतने से ज्यादा कुशी हो रही थी | वह हारकर भी बहुत कुशी अनुभव कर रहा था | उसने अपने मान सम्मान को भी दाव पर लगा दिया था | जब लोगों को इस बात का पता चला तो चारों तरफ पहलवान की जय- जय कार होने लगी | इतना सम्मान तो उसे जीतकर भी नहीं मिला था जितना आज हारकर मिला | चारों तरफ उसकी सहृदयता के चर्चे हो रहे थे |पहलवान बहुत खुश था और राघव भी बहुत खुश था|

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