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Kavita on varsha ritu \ poem on rainy season

best poem on rain

रिम झिम की लग गई छड़ी रे

इन्द्र की घूम गई छड़ी रे

आई आई सावन रुत आई रे

नभ में घटा फिर छाई रे

गा रही सखियाँ मिलन के गीत रे

पड गए झूले , मिले मनमीत रे

गोरी के दिल में जागी है प्रीत रे

निभाएंगे मिलकर प्रेम की रीत रे

बारिश का एक और रंग

घिर घिर आये जल भरे बदरा

मन में उमंग सी जगा गए बदरा

पपीहे ने पुछा पी कहाँ है

नैनो से फिर तो बरस गए बदरा

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