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Sangharsh hi safalta ki kunji hai –

संघर्ष

कठिनाईयां तो सभी के जीवन में आती ही रहती है आई हुई तकलीफों से लड़ना ही सफलता की कुंजी है | कठिन समय आता है , तकलीफे भी आती है उससे घबराकर अगर हम उनका सामना नहीं करेंगे तो उससे हमे बड़ा नुक्सान पहुँच सकता है | हमपर , हमारे घर पर और हमारे धर्म पर अगर कोई हमला करता है और हम चुपचाप डरकर बैठे रहेंगे तो वो हमे नुक्सान पहुन्चाके चले जायेंगे | वाही हम भोलोवर से लड़ते है , उनका सामना करते है तो हम उन्हें हरा सकते है और जो नुक्सान वो हमे पहुंचाने आये थे उससे बच सकते हैं | तो यहाँ हमने देखा कि अपने बचाव के लिए हमने संघर्ष किया और हमे कामयाबी मिली ऐसा ही एक उदाहरण ये भी है —

राजेश एक अच लड़का था | अच्छे घराने और अच्छे परिवार से था | लेकिन उसकी निजी आर्थिक परिस्तिथि अच्छी नहीं थी | म्हणत मजूरी करके अपना पेट भरता था | राजेश के जीवन में कठिनाइयान और तकलीफे बहुत आई लेकिन उसने कभी भी हार नहीं मनी और संघर्ष करता रहा और कभी भी मेहनत करने से डरा नहीं , कठिन से कठिन काम भी जैसे ठेला खीचना , दुकानों में सामान लोडिंग अनलोडिंग का काम , ग्राहकों के गाडी साफ़ करना इत्यादि ऐसे बहुत से काम में ख़ुशी ख़ुशी कर दिया करता था और यह सब काम करने में वह कभी शर्म या बुराई नहीं समझता था | उसका मानना था की काम छोटा या बड़ा नहीं होता | इमानदारी से किया गया काम अपने मन को ख़ुशी देनेवाला होता है | राजेश एक मिलनसार और हसमुख व्यक्तित्ववाला और अच्छे संस्कार वाला लड़का था | लेकिन परिवार में समाज में उसकी अच्छाई कि कोई किम्मत नहीं थी क्युकी वह गरीब था | पैसों की कमी के कारण वह अच्छे कपडे नहीं पहन सकता था | पेट भरने के लिए जितना जरूरी था उतना ही कम पता था | एक बार राजेश ठेला खीच रहा था और सामने से आती हुई एक गाडी से टकरा गया | गाडी में से एक शख्स बहार निकले और उन्होंने अपनी गाडी का मुआएना किया | गाडी बिलकुल ठीक थी , राजेश को थोड़ी चोट आई थी लेकिन राजेश तुरंत उठकर आया और उस शक्श से माफ़ी मांगते हुए कहने लगा ” सेठजी मुझसे गलती होगई मै देख नहीं पाया और आपकी गाडी से टकरा गया “| सेठजी ने देखा गाडी को तो कुछ नुक्सान नहीं हुआ लेकिन राजेश को तो चोटें आई है फिर भी ये लड़का मुझसे माफ़ी मांग रहा है | सेठजी की पारखी नज़र ने सब कुछ नापते हुए समझ लिया कि यह एक भला इन्सान है| उन्होंने राजेश से कहा “कोई बात नहीं , तुम्हे चोट आई है , चलो गाडी में बैठ जाओ में तुम्हे किसी अच्छे अस्पताल में ले चलता हूँ” |

राजेश ने कहा -” नहीं नहीं सेठजी कुछ ज्यादा नहीं लगी में ठीक हो जाऊंगा “| सेठ ने पुच – ” तुम क्या करते हो ?” तो राजेश ने बताया कुछ ख़ास नहीं बस पेट भर लेता हूँ | सेठजी ने उसकी इमानदारी को देखते हुए उसे कहा कि क्या तुम मेरे साथ मेरे शोरूम में काम करोगे ?

राजेश ने धन्यवाद कहा और कहा कि अगर आप ठीक समझो तो में तैयार हूँ | और राजेश सेठजी के यहाँ ज्वेल्लेरी शोरूम में काम करने लगा | कुछ ही दिनों में वह काम सीख गया और मन लगाकर करने लगा | धीरे धीरे उसकी हालत सुधरने लगी अब वह साफ़ सूत्रे कपडे पहेनकर रोज़ शोरूम में जात था | उसकी मेहनत इमानदारी देखकर कुछ समय बाद सेठजी ने उसे मेनेजर बना दिया | राजेश अब सेठजी के गाडी में आने जाने लगा था | एक अच्छा घर भी सेठजी ने उसे दिला दिया | सेठजी राजेश से बहुत खुश रहते थे और उसे अपने बेटे की तरह देखने लगे | राजेश ने शादी कर ली और घर बसा लिया | राधा एक अच्छी लड़की के रूप में , पत्नी के रूप में मिली | उनको बच्चे हुए और उनकी ग्रहस्ती बहुत अच्छे से चलने लगी | राजेश ने जो कठिन समय देखा था | वो उसके संघर्ष करने के कारन सुख में बदल गया| यह सब देखकर परिवार और समाज के लोग जो कभी राजेश से बात भी नहीं करते थे अब राजेश के आस पास मंडराने लगे उससे बात करने के बहाने ढूंडने लगे | एक बार परिवार में किसीकी शादी थी | परिवार वाले राजेश को निमंत्रण देने आये कहा – आपको आना ही होगा | आपके आने से ही फंक्शन की शोभा बढ़ेगी | राजेश को बहुत हसी आई , राजेश ने अपने पुराने कपडे निकलकर घरवाले के सामने रखा और कहा देखिये -” जब में अपने पुराने कपड़ो में था तब मुझे कोई पहचानता भी नहीं था |अपने पास भटकने भी नहीं देते थे आज मै साफ़ सूत्रे कपडे पेहेनता हूँ , आज मेरे पास सब कुछ है | तब आप सब मेरे पास आये हो और मुझे शादी में आने का निमंत्रण भी दे रहे हो | तो इज्जत तो इन कपड़ो की हुई | मैं तो कहीं हूँ ही नहीं मैंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है और ये सब पाया है पर मेरी मेहनत और मैंने जो पसीना बहाया है उन सबकी की कदर आप सबने कभी नहीं की | लेकिन आज जो मैंने पाया है , इक्कट्ठा किया है उन सबकी आप सबके नज़र में बहुत कदर है | सब बातों से मैंने यह सीखा है की संघरश करके सफलता तो हासिल करता है साथ में समाज में , परिवार में मान सम्मान भी इज्ज़त भी अपने आप ही चलकर उसके पास आ जाते है |

धन्यवाद

मंजू मधोगरिया

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