The best article to find what is right or wrong (क्या सही ? क्या गलत?)

 

क्या सही क्या गलत ? क्या यह कोई जनता है ? क्या तुम जानते हो ? नहीं |

क्यूंकि इसका फैसला करना बहुत मुश्किल है कि हमारे जीवन मैं क्या सही है और क्या गलत |क्यूंकि जबभी मैं कुछ बोलना चाहूंगी, बताना चाहूंगी तो क्या आप उस बात को मानोगे ? नहीं | क्यूंकि मेरी कही बात आपके सोच से अगर मेल नहीं खाती है तो वहां मैं गलत हो जाती हूँ | वहीँ आपके और मेरे आलावा तीसरे व्यक्ति को यदि मेरी कही बात समझ मैं आ जाती है तो वहां मैं सही हो जाती हूँ |आज स्थिति ऐसी है , समय ऐसा है कि एक छोटे से बच्चे को भी हम सलाह नहीं दे सकते | हमारी कही बात को वो भी दस बार सोचता है कि यह मेरे हीत मैं है कि नहीं , सौ सवाल करता है | इस बात से मुझे क्या लाभ है |

बच्चों को मोबाइल ,लैपटॉप , टैब आदि देना हम गलत समझते है क्यूंकि उनकी आँखों के लिए हानिकारक है | लेकिन क्या हम उन्हें ऐसा करने से रोक पाते हैं ?

कहाँ तक रोक पायेंगे , आजकल तो पढाई भी ऑनलाइन ही हो रही है | बच्चे ऑनलाइन पढाई के बहाने मोबाइल में गेम्स खेलते हैं | उनकी तो मन की मुराद पूरी हो गयी है | जो चीज़ मांगने पर भी नहीं मिलती थी वो चीज़ बिना मांगे सोने के अंडे जैसे हाथ मे आगया है | मोबाइल जब हाथ में आगया है तो समझो पूरी दुनिया सिमट कर हातो में आगई है| उसके आस पास क्या हो रहा है उसे पता ही नहीं होता | उन्हें किसकी जरूरत भी महसूस नहीं होती | मैंने तो यहाँ तक देखा है कि बच्चा मोबाइल देखकर ही खाना खाता है | बच्चे का ध्यान सिर्फ मोबाइल चलने पर होता है और माँ उसके मूह में खाना दाल रही है | ना तो उसको कोई स्वाद का पता ,ना तो उसको ये पता कि वह क्या खा रहा है | माँ खुश की मेरे बच्चे ने खाना खा लिया |हर माँ बाप अपने बच्चे को अच्छे से अच्छा देना चाहते हैं और देते भी है| बच्चे के लिए क्या सही है क्या गलत सबका बहुत ध्यान रखते हैं लेकिन आज का बच्चा किसी भी उम्र का हो कभी भही नहीं मानता है |अंत में बच्चा नहीं समझता और कहता  है आपने हमारे लिए क्या किया ? क्यूंकि वह अपने आस पास के बच्चों से उनके पास क्या है उनसे तुलना करता है | कहते हैं ” उनके माता पिता को देखिये उन्होंने अपने बच्चों को इतना सब कुछ दिया है ” | उन्हें यह नहीं पता कि क्या सही है और क्या गलत , इसिलए वह ये सब बोलते  हैं | आज के समय के हिसाब से कहिये या आज का इंसान कहिये | अपने आप को इतना बिजी कर लिया है कि उसे किसीकी जरूरत ही महसूस नहीं होती | पर ऐसा नहीं है अकेला इंसान कुछ दिन कुछ साल तो अकेले समय व्यतीत कर सकता है लेकिन एक समय जरूर ऐसा आता है जब इंसान खुद से उब जाता है और एक साथी ढूँढता है जिससे वह बात कर सके अपने मन की बात कह सके |लेकिन उस समय उसे कोई भी नहीं मिलता | क्यूंकि उसने कभी किसी का साथ नहीं दिया | धीरे धीरे वह डिप्रेशन का शिकार बन जाता है |आजकल बहुत बच्चे भी देप्रेस्सिओह का शिकार बन रहें है | इनसब से बचने के लिए . इंसान को सही गलत का फैसला खुद करना चाहिए और हसी हसी अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए |

 

 

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